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Fathers Day Poem In Hindi - पिता दिवस पर कविता 2020 - Father's Day Par Kavita ...



बना  रहा है मेरे लिये पक्के मकान
उसका घर अभी भी कच्चा है

 माथे पे सिकन काँधे पर पसीना घुटनो में दर्द
और फिर भी कहता है सब अच्छा है 

माना कभी मुझको गले नहीं लगाता
प्यार होकर भी प्यार नहीं जताता
याद रखता है तौफे देता है
वो अपना जन्मदिन नहीं मनाता
मेरी हर जिद हर मर्जी पुरा करता है
उसकी ख्वाहिशें क्या है नहीं बताता
कोई पुछ ले मेरे काम काज के बारे में
तो कहता है वो तो अभी बच्चा है

 कमजोर आंखे थरथराते हाथ लड़खड़ाती जुबान
और फिर भी कहता है सब अच्छा है 

नामुमकिन में मुमकिन ढूंढ लाता है
वो अक्सर घर देर आता है
जिक्र नहीं करता हालातों को अपनी
हमेशा खुद को अमीर बताता है
वो बाप है जिन्दगी जीने का तरीका बताता है
कभी डांट लगाता है कभी पीठ थप्थपाता है
जो बाहर से कुछ और अन्दर से कुछ
वो इन्सान कैसे सच्चा है 

 खाली जेब पुराने कपडे फटे जुते
और फिर भी कहता है सब अच्छा है




Paresaaniyo ka chehra sukoon ka naqaab 
Samajhta khud ko fakeer bete ko nawab 

Nind puri nahi hoti subah ghar se nikal jata hai
Jeb khali bhi ho gar to ghar me khushiya lekar aata hai

Thoda gussail hai rakhta chehre par muskaan hai
Aaj is bete ke taraf se har pita ko salam hai

@yourashish

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